शोधकर्ताओं का दावा, सही समय पर लगा लॉकडाउन, नहीं तो आ जाती मौत की सुनामी

bookdhara
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चीनी वायरस कोरोना के कारण पूरी दुनिया में फैली कोविड—19 महामारी के कारण 10 लाख से ज्यादा लोग अपनी जान गवां चुके है। वहीं भारत में भी 1 लाख से अधिक लोगों को अपनी जान गवानी पड़ी है। ऐसे में सरकार का दावा है ​कि लॉकडाउन लगाने के कारण भारत में कोरोना के प्रभाव को काफी हद तक थाम कर रखा है।

देश में कोरोना के प्रसार, रोकथाम,के आंकड़ों का अध्ययन करने के लिए बनाई गई नेशनल सुपरमॉडल कमेटी ने लम्बे शोध के बाद आंकड़े पेश किये है। यह आंकड़े सरकार के दावे पर मुहर लगा रहे है।

कमेटी के चेयरमैन व आईआईटी हैदराबाद के प्रोफेसर एम विद्यासागर ने आज जानकारी देते हुए बताया कि अगर लॉकडाउन न लगाया जाता तो देश में जून तक 1 करोड़ 40 लाख कोरोना के मामले होते जबतक अगस्त तक 25 लाख लोगों को मौत हो चुकी होती। वहीं अगर लॉकडाउन 1 अप्रैल से 1 मई के बीच लगाया जाता तो, जून तक 40—50 लाख केस होते। वहीं अगस्त तक 6 से 10 लाख लोगों की मौत हो जाती।

त्योहारों में बढ़ेगा कोरोना का संक्रमण

कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि आगामी त्योहारी मौसम में अगर लापरवाही बरती गई तो कोरोना मामलों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हो सकती है।
केरल के ओणम पर्व की स्टडी के मुताबिक 22 अगस्त से 2 सितंबर तक त्योहार मनाया गया था। जिसके परिणाम स्वरूप 8 सितंबर के बाद से केरल में कोरोना मामलों में तेजी से बढ़त आयी है।

इसी आधार पर आगामी त्याहोरों के मौसम को देखते हुए कमेटी ने कहा की अगर सुरक्षा मानकों को नहीं अपनाया गया तो नवंबर तक 26 लाख नये केस आ सकते है।

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