राइस मिल की समस्याओं पर हुई पत्रकार वार्ता

bookdhara
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कानपुर। सरकार द्वारा किसानों को धान के समर्थन मूल्य में बढ़ोतरी किए जाने को लेकर यूपी राइस मिलर्स एसोसिएशन ने स्वागत किया है। साथ ही कहा है कि यह वृद्धि वास्तव में ऐतिहासिक वृद्धि हैं। मगर यूपी राइस मिल के पदाधिकारियों का कहना है कि सरकार की कुछ नीतियों की वजह से यूपी में राइस मिल का धंधा धीरे धीरे बंदी की कगार पर पहुँच गया है।

राइस मिल के पदाधिकारियों की माने तो धान की कुटाई को लेकर कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा हैं। जिसमें चावल की रिकवरी प्रतिशत, धान में नमी की मात्रा, होल्डिंग चार्ज की अवधि बढ़ाए जाने के संबंध में, हाइब्रिड धान के संबंध में, राइस मिलर को धान खरीद में शामिल किए जाने के संबंध में भारतीय खाद्य निगम के मानकों में शिथिलता किए जाने की बात कही है।

राइस मिलर की माने तो उत्तर प्रदेश में चावल उद्योग कृषि पर आधारित सबसे बड़ा उद्योग तथा बहुत बड़ा रोजगार सृजन का माध्यम नहीं है। मगर उनका कहना है कि इन समस्याओं की वजह से कृषि उपज पर आधारित चावल उद्योग भारी संकट संकट में है। अधिकतर मिले रिकवरी मिलिंग खर्चा, क्रय एजेंसियों की मनमानी के कारण आर्थिक रूप से कमजोर होकर बंद हो गई हैं और शेष बंदी की कगार पर हैं। इसलिए उत्तर प्रदेश में लगभग 13 से 14 हजार राइस मिले थी जो इस समय 1800 की संख्या में बची है।

  • कौस्तुभ शंकर मिश्रा
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