नहीं रहे होमियोपैथी के “आइस्टिन” डा. प्रफुल्ल विजयकर

bookdhara
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आजमगढ़। होमियोपैथी के आइस्टिन के नाम से प्रसिद्ध मुंबई के चिकित्सक डा. प्रफुल्ल विजयकर के निधन से मर्माहत चिकित्सकों ने रविवार को होमियोपैथिक मेडिलक एसोसिएशन आफ इंडिया के बैनर तले डा. भक्तवत्सल के आवास पर बैठक कर शोक संवेदना व्यक्त की। डा. विजयकर के निधन को होमियोपैथी जगत के लिए अपूरणीय क्षति करार दिया।

केंद्रीय होमियोपैथिक परिषद के पूर्व सदस्य डा. भक्तवत्सल ने कहा कि होमियोपैथिक को डा. प्रफुल्ल ने होप फार होपलेस का जो मंत्र दिया वह आज पूरे विश्व में लोग आत्मसात कर रहे हैं। आगे भी उनके द्वारा बताई गयी चिकित्सा शिक्षा से करोड़ों लोग लाभान्वित होते रहेंगे। उन्होंने कहा कि मार्डन मेडिसिन एंव जेनेटिक बिमारियों में होमियोपैथी के सफलतापूर्वक प्रयोग के कारण डा. विजयकर लाखों होमियोपैथिक चिकित्सकों के पथ प्रदर्शक बने। आज उनके निधन से जो क्षति हुई है उसकी भरपाई संभव नहीं है।

इस दौरान चिकित्सकों ने दो मिनट का मौन रखकर गतात्मा की शांति के लिए प्रर्थना की तथा उनके बताए रास्ते पर चलकर मानवता की सेवा का संकल्प लिया। इस मौके पर डा. एसके राय, डा. राजेश तिवारी, डा. प्रमोद गुप्ता, डा. देवेश दुबे, डा. नेहा दुबे, डा. एके राय, डा. बी पांडेय, डा. रणधीर सिंह, डा. राजीव आनंद, डा. प्रभात, डा. अनुराग श्रीवास्तव, डा. अभिषेक राय, डा. मनोज मिश्र, डा. अनिमेष वत्सल, श्रीमती अर्चना वत्सल आदि उपस्थित थी।

रिपोर्ट :- शैलेन्द्र शर्मा

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