व्यंग : होली का रंग लगने लगा बेरंग, इश्क तो है लेकिन कैसे ले रिस्क

bookdhara
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शहर के एक विभाग में रंगीले टाइप के दो बौराये दिलों की चर्चायें होने लगी आम

कानपुर। रंगों का त्योहार होली हो और मन बौराये न तो चंचल मन किसका काम का.. विकास वाले विभाग में रंगबाजी के लिये मशहूर दो रंगबाजों का दिल इन दिनों रंगों से ज्यादा सादगी पसंद कलीग के लिये बौराया हुआ है। अब वो जमाने चले गये खत में फूल रखकर भेज दे और कह दे फूल तुम्हे भेजा है खत में फूल नहीं मेरा दिल है.. काहे का आधुनिक जीवन शैली में कबूतर, खत की जगह अब मोबाइल ने ली है और बैरी मोबाइल से पकड़े जाने का डर बहुत रहता है सो दोनों रंगीले मायूस है कि मैडम तक दिल का बात कैसे पहुंचे।

रंग भी नहीं लगा सकते तो कम से कम हैप्पी होली बोलकर मुस्कुराता हुआ चेहरे ही देख ले। विकास वाले विभाग में सक्रिय लल्लन टॉप टाइप के खबरियां चाचा से कहां कोई बात छुपती है। उड़ती उड़ती बात उनके कानों तक क्या पहुंचे जनाब ने लिफाफा देखकर मजनून समझ लिया। इश्क के समंदर में अकेले गोते लगा रहे विकास वाले विभाग के दोनों रंगीले कर्मचारियों का दर्द भी छलकते जाम की तरह सामने आ गये। ठंडी आह.. लेकर अपने चेले से बोले यार मैडम को देखकर बड़ा सकून मिलता है… दो दिन बाद होली है लेकिन लगता है रंग बेरंग हो जायेगा…

चेला भी कलाकार था झट से बोला साहब रंग भले न खेल पाये कम से कम जाकर हैप्पी होली ही बोल दीजिये कम से कम कुछ तो नजरे इनायत होगी। लेकिन दिल का दर्द इससे कहीं ज्यादा था, क्योंकि इश्क की राह में एक और मजनू इकतरफा इश्क में जल रहा था । इधर बेचारी मैडम एक बड़ा दुख झेल कर खुद को सम्हाले हुए हे लेकिन उन्हें पता नहीं है कि उनके लिये कई भंवरे परेशान है। इतना तो तय है कि मैडम को पता चला गया तो दोनों की भद्द पिट जायेगी क्योंकि एक साहब तो इस मामले में बदनाम है दूसरे छुपे रूस्तम है सो वह खुलकर इश्क की गली में गुलाटी तो नहीं मारेंगे। लेकिन होली के रंग मे अपना रंग जमाने के लिये मैडम तक पहुंचने मे जुगत जरूर लगा रहे है। वैसे अपने मंसूबे में सफल भी हो जाते लेकिन कुछ दिन पहले नये साहब ने गद्दी संहाली है उनके बारे में बिना कुछ जाने इश्क में रिस्क दोनों रंगीले लेना नहीं चाहते लेकिन विकास वाले विभाग में होली से ज्यादा इन रंगीलों की चर्चा ज्यादा है।

शाहिद पठान (लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)
डिस्क्लेमर : हमारा मकसद किसी विभाग, व्यक्ति को बदनाम करना या उसकी छवि धूमिल करना नहीं है। विभागों में होने वाली गतिविधियों को व्यंग के तौर पर मनोरंजन के तौर पर आप तक पहुंचाना मकसद है। विभागों में होने वाली चर्चाओं की हम पुष्टि भी नहीं करते है।

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